Pratha Pratigya

आंकड़ों के मुताबिक, फसल विपणन सत्र 2022-23 में गेहूं की सरकारी खरीद भारी गिरावट के साथ 187.92 लाख टन रह गई। यह एक साल पहले के खरीदे गए 433.44 लाख टन के मुकाबले 57 फीसदी कम है।

गेहूं का सरकारी भंडार अक्तूबर की शुरुआत में बफर मानक से 11 फीसदी बढ़कर 227.46 लाख टन पर पहुंच गया। हालांकि, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के गोदामों में रखे गए गेहूं की मात्रा पांच साल के निचले स्तर पर आ गई है।

गेहूं की उपज में गिरावट आने से सरकारी खरीद 57 फीसदी तक कम रहने और निजी कारोबारियों की अधिक खरीद से एफसीआई के गेहूं भंडार में गिरावट आई है। खाद्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, धान का भंडार एक अक्तूबर तक 283.9 लाख टन पहुंच गया, जो बफर भंडार के निर्धारित मानक के दोगुने से भी अधिक है।

निर्धारित मानकों के मुताबिक, सरकार को अपने बफर भंडार में 205.2 लाख टन गेहूं और 102.5 लाख टन धान का स्टॉक एक अक्तूबर तक रखना होता है। खाद्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, गेहूं का भंडार अब सुविधाजनक स्तर पर पहुंच गया है।

सरकार ने इस साल 57 फीसदी कम गेहूं खरीदा
आंकड़ों के मुताबिक, फसल विपणन सत्र 2022-23 में गेहूं की सरकारी खरीद भारी गिरावट के साथ 187.92 लाख टन रह गई। यह एक साल पहले के खरीदे गए 433.44 लाख टन के मुकाबले 57 फीसदी कम है। इसकी प्रमुख वजह निजी कारोबारियों की ओर से बड़े पैमाने पर की गई खरीदारी है। इसके अलावा, गेहूं का उत्पादन भी इस साल 3 फीसदी कम रहा है। सरकारी खरीद में गिरावट आने से सरकार ने इस गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी। नई फसल के लिए बुवाई की शुरुआत होने वाली है।

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