Pratha Pratigya

छापीहेड़ा//
रावण को मारने की फिर चली हे देखो बात पर उसके गुणों पर भी तो हो दृष्टिपात।माता सीता का शील उसने रखा बरकरार यहां तो नारियों ओर बेटियो की इज्जत हो रही तार तार। ये पंक्तियां समीपस्थ ग्राम देवली सांगा में मां दुर्गा उत्सव समिति द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन में। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन कर रहे हेमंत दुबे (संडावता) ने चांदनी रात में मेरा दीदार मत करना,कड़ी धूप मे मेरा इंतजार मत करना।गीत पड़कर मादकता बिखेरी। नवोदित कवि अश्विन नागर ने आक्रोश का भाव भरते हुए_56 इंची सीने को यूं न सिकोड़ों मोदीजी, हिदुस्तानी खून खौलता मोदीजी। पड़कर राष्ट्र स्वर को उकेरित किया।पचोर से आए मधुर गीतकार राजेश यादव”राज” ने प्रभुजी तुमने काहे को कलियुग बनाया?…..गीत पड़कर पड़कर पतनशील संस्कृति पर कड़ा प्रहार किया।एक अन्य कवि सुधीर गुरु ने जिन्होंने प्राण बेचकर दी आजादी उनका मत अपमान करो….. पड़कर तालियां बटोरी। वहीं भूमका से आए प्रेम पेंटर ने युवा पीढ़ी बहक रही है, मर्यादा को तोड़ रही हैं,धर्म बिचारा रोता हे।गीत पड़कर उपस्थित जन समूह को चिंतन देने का प्रयास किया।सोयत से आए बालकवि नीरज कुशवाह ने भी शानदार प्रस्तुति देकर मन मोह लिया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में मां सरस्वती के समक्ष वरिष्ठ कवि राजेश यादव राज व साहित्यकारों ने दीप प्रज्ज्वलित किया। आमंत्रित कवियों का स्वागत आयोजक समिति के मांगू सिंह उमठ, कैलाश कुशवाह, महेश्वर सिंह आदि ने किया।ग्राम देवली सांगा मे प्रथम बार हुए विशाल कवि सम्मेलन में देर रात तक श्रोता मंत्रमुग्ध हो आनन्द लेते रहे।

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