Pratha Pratigya

वाराणसी के ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी मामले को लेकर अब कार्बन डेटिंग चर्चा में है. दरअसल, इस केस में हिन्दू पक्ष की ओर से ज्ञानवापी परिसर में मिले कथित शिवलिंग की कार्बन डेटिंग और वैज्ञानिक परीक्षण कराने के मांग पर मुस्लिम पक्ष ने आपत्ति दर्ज कराई है.

यानी मुस्लिम पक्ष कथित शिवलिंग की कार्बन डेटिंग नहीं करवाना चाहता है. अब कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए 7 अक्टूबर तक अपना फैसला सुरक्षित कर दिया है.

ऐसे में सवाल है कि आखिर कार्बन डेटिंग क्या होती है, ये कैसे की जाती है और इस परीक्षण से कथित शिवलिंग को लेकर क्या क्या जानकारी सामने आ सकती है. ऐसे में जानते हैं कार्बन डेटिंग से जुड़ी कुछ खास बातें…

क्या है ताजा अपडेट?

दरअसल, ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने में मिली एक आकृति पर विवाद चल रहा है. जो हिंदू पक्ष इस आकृति को शिवलिंग बता रहा है, वो चाहता है कि इसकी कार्बन डेटिंग हो. लेकिन, मुस्लिम पक्ष ने इसकी कार्बन डेटिंग होने को लेकर आपत्ति दर्ज की है. मुस्लिम पक्ष का कहना है कि इसकी पुरातत्व विभाग से कोई भी जांच नहीं करवानी चाहिए और कोई भी वैज्ञानिक जांच इसे लेकर नहीं होनी चाहिए.

पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, हिंदू पक्ष की एक वादी राखी सिंह ने भी कार्बन डेटिंह कराने की मांग को गलत बताया है. उनका कहना है, ‘ज्ञानवापी परिसर में मिले ‘शिवलिंग’ की कार्बन डेटिंग और वैज्ञानिक परीक्षण से उसे नुकसान पहुंच सकता है. इसलिए शिवलिंग की कार्बन डेटिंग और वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाना उचित नहीं है.’

आखिर होती क्या है कार्बन डेटिंग?

जब भी कोई चीज काफी पुरानी होती है तो उससे बनने या उसकी उम्र का पता लगाने के लिए इस वैज्ञानिक विधि का सहारा लिया जाता है. वैसे तो कई तरह से इनका पता लगाया जाता है, लेकिन कार्बन डेटिंग को काफी हद तक सही माना जाता है. यह एक एब्सोल्यूट डेटिंग विधि होती है, जिसमें काफी हद तक साल आदि के बारे पता चल जाता है. अब भी इमारतों के बनने की तारीख आदि का पता लगाना हो तो इसी तरीके का इस्तेमाल किया जाता है.

दरअसल, किसी भी सामान पर कार्बन आईसोटोप्स रहते हैं. इसमें कार्बन 12,13,14 आदि होते हैं. इसमें कार्बन 14 में परिवर्तन होता है और कार्बन 12 हमेशा वैसे ही रहते हैं. इनकी जांच से कार्बन 12 और कार्बन 14 में अंतर करके उसकी आयु पता लगाने की कोशिश की जाती है. इसमें कार्बन 12 से तुलना करके देखा जाता है कि कार्बन 14 की मात्रा कितनी कम हो गई है. उसके आधार पर उसकी उम्र का पता चलता है.

ऐसे में कहा जा सकता है कि अगर ज्ञानवापी के कथित शिवलिंग की जांच की जाती है तो इससे पता चल जाता है कि यह कितना पुराना है और इसका निर्माण कब करवाया होगा.

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One thought on “ज्ञानवापी: मुस्लिम पक्ष चाहता है- ना हो कार्बन डेटिंग. जानिए- अगर हो जाए तो क्या पता चलेगा ?”
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