Pratha Pratigya

प्रथा प्रतिज्ञा

न्यूज रिपोर्ट राकेश कुमार

डायबिटीज को कंट्रोल किया
जा सकता है परन्तु खत्म नहीं

डा. मनीष मिश्र
एम.डी., डी.कार्ड (पी.जी.डी.सी.सी.) एफ.आई.सी.आर.
फैलोशिप इन ईको कार्डियोग्राफी
हृदय रोेग विशेषज्ञ एवं फिजीशियन

रायबरेली।डायबिटीज यानी मधुमेह आज कल एक बेहद आम बीमारी बन गई है अगर इस बीमारी को कंट्रोल नहीं किया गया तो शरीर को एक दीमक की तरह खोखला बना देता है और शरीर के विभिन्न अंगो को प्रभावित करने लगता है। इसलिये इण्टरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन और विश्व स्वास्थ्य संगठन ;डब्लू0एच0ओ0द्ध ने लोगों के बीच मधुमेह के बारे में जागरूकता फैलाने के मकसद से वर्ल्ड डायबिटीज-डे को मनाने की शुरूआत की थी। विश्व डायबिटीज डे 14 नवम्बर को मनाने का एक मुख्य कारण यह भी है कि इन्सुलिन की खोज करने वाले वैज्ञानिक फ्रेडरिक का जन्म 14 नवम्बर को ही हुआ था। यह दुनिया के सबसे बड़े जागरूकता अभियानों में से एक है। इसे 160 से अधिक देशों में 1 अरब से अधिक लोगों द्वारा एक साथ मनाया जाता है। विशेषकर भारत में 5 में से 1 व्यक्ति डायबिटीज से प्रभावित है और भारत देश में पूरे विश्व की तुलना में डायबिटीज के मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा है।
डायबिटीज किसी वायरस या बैक्टेरिया के कारण नहीं होता है। मनुष्य ऊर्जा के लिये भोजन करता है यह भोजन स्टार्च में बदलता है फिर स्टार्च ग्लूकोज में बदलता है। जिन्हे सभी कोशिकाओं मंे पहुॅचाया जाता है। जिससे शरीर को ऊर्जा मिलती है। ग्लूकोज को अन्य कोशिकाओं तक पहुॅचाने का काम इन्सुलिन का होता है और डायबिटिक रोगी के शरीर में इन्सूलिन बनना बंद अथवा कम हो जाता है जिससे शरीर के खून में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है सामान्य स्वस्थ्य व्यक्ति के खाली पेट ग्लूकोज की मात्रा ;थ्ठै्रद्ध 70-100 उहध्कस रहता है। खाने के डेढ़ से 2 घंटे के बाद यह मात्रा ;च्च्ठैद्ध 120-140 उहध्कस हो जाता है।

डायबिटीज 2 प्रकार की होती है –
टाइप 1 डायबिटीज – इसमें रोगी के शरीर में इन्सुलिन की मात्रा कम बनती है जिसे नियंत्रित किया जा सकता है, पर खत्म नहीं किया जा सकता है इसमें रोगी को इन्सुलिन इन्जेक्शन के द्वारा दिया जाता है यह बच्चो और 19 साल तक के युवाओं को हो सकता है।

टाइप 2 डायबिटीज – रोगी के शरीर में इन्सुलिन की मात्रा कम होती है या शरीर इन्सुलिन का पूर्णतः इस्तेमाल नहीं कर पाता है। इसको योग, परहेज, दवाइयों तथा उचित खान-पान के जरिये नियंत्रित किया जा सकता है। यह व्यस्को में होता है। डायबिटीज के रोगी के शरीर में सुगर की मात्रा को संतुलित रखना आवश्यक होता है क्यूंकि कम तथा अधिक दोनो ही स्थिति में रोगी के लिये प्राण घातक हो सकता है।
डायबिटीज होने के कारण –
अनुवांशिक, इन्सुलिन की कमी या इन्सुलिन रिसेप्टर रजिस्टेंश, सही खान पान का न होना, तनाव, शारीरिक काम की कमी, ड्रग्स, स्मोक करना।

लक्षण:- अत्यधिक भूख लगाना, प्यास ज्यादा लगना, पेशाब ज्यादा लगना, किसी घाव को भरने में बहुत अधिक समय लगना, शरीर के कुछ भागों का सुन्न होना, आँखो से कम दिखना, जल्दी थकान होना, किसी भी चीज का जल्दी इन्फेक्शन होना, पैरों में दर्द, कमजोरी।

ध्यान रखने योग्य बाते –
पर्याप्त 6-7 घंटे की नींद लें।
मॉर्निग वाक एवं योग को दिनचर्या मे शामिल करें।
दवाओं को नियमित ले और डाक्टर की सलाह को माने।
संतुलित आहार डाक्टर की सलाह लें।
उचित समय अंतराल में डाक्टर की सलाह से जॉच करायें।
डायबिटीज को कंट्रोल किया जा सकता है परन्तु खत्म नहीं
तनाव से ब चें।

अगर डायबिटीज को कंट्रोल न किया जाय तो ये हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी फ्लय्योर या अंधापन का खतरा बढ़ जाता है

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